Home

Lazy Scribbles.

Some random thoughts, some blabbering, some prose, and some poetry.
Work is in progress.

Latest from the Blog

The Past Weighs Only 17 Gram

It was a heavy burden, Penned in a brown journal. Of mistakes and misery, Of hopes and Whataboutery!  Years flew and the attempts grew, What has now become of you?It used to ask me, staring me in my face,My own journal, whom I couldn’t face. It felt heavy, like every aspirant’s pastYears of failures and hopes,The … Continue reading The Past Weighs Only 17 Gram

रोता शहर

रोता शहर

बता ए शहर तुझे हुआ क्या है,शमशान में नहीं थमता धुआं सा हैबहती लाशें, चुभते मंजरअभी भी तेरे शहर में दिल हैं बंजर आज देखा मैंने तेरा राजा रोता सा है,खोखली बातें मगर बोलता तोता सा है !जब लगी थी आग, तेरा पहरेदार सोता सा हैइसीलिए ए शहर,यहाँ मुर्दों का जमघट जमा होता सा है … Continue reading रोता शहर

खर्राटे

रात की ये तन्हा उदासी,उसमे मधुर संगीत तुम्हारे खर्राटेऐसे सुरमई तुम्हारे खर्राटेमानो म्यूजिशियन गिटार बजातेनए सुर पकड़, नयी तान सुनातेदिल बहलाते तुम्हारे खर्राटे रात की ये शांत वीरनियत,उसे चीरते तुम्हारे खर्राटेऐसे गूंजते तुम्हारे खर्राटेमानो बंजर जमीन पे ट्रेक्टर चलाते अंत में रात में यूँ पसरा सन्नाटा,इक चोर झांके, मिले माल झन्नाटामगर तुम्हरे खर्राटों से उसका … Continue reading खर्राटे

Get Update